जाओ यहाँ से...///रश्मि प्रभा

मत करो कोई प्रश्न मुझसे

जवाब बनाते बनाते
खुद को जांबांज दिखाते दिखाते
मैं एक खाली कमरे सी हो गई हूँ !
संजोये हौसले
मंद बयारें
और मासूम मुस्कुराहटें
मैं लुटाती गई
और तुम सब पूछते गए
ये कहाँ से ? ये कहाँ से ?
और मैं झूठे नाम गिनाती गई
हटो यहाँ से -
इन सबों की स्वामिनी मैं खुद हूँ
अगर कभी कोई नाम लिया
तो उसे भी अपनी सोच से धरोहर बनाया
धरोहर कुछ था नहीं !
अपने प्रश्नों के उत्तर एक दिन तुम्हें मिलेंगे ज़रूर
कि सबकुछ जानते हुए
तुम अनजान बने रहे
और मेरे आगे एंवे प्रश्न रख
मुझे उलझाते रहे ...
जानती हूँ फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा
.....
खैर ,
मेरे उत्तरदायित्व अभी पूरे नहीं हुए हैं
अपने कमरे को मुझे खजानों से भरना है
हौसले , मंद बयारें और मासूम मुस्कान !
क्योंकि इसके बगैर
मुझसे निकली शाखाएं पनपेंगी नहीं
और मैं इन शाखाओं पर
विश्वास के फल लगे देखना चाहती हूँ
तो ....
प्रश्नों के पिटारे बन्द करो
और जाओ यहाँ से ....

 --रश्मि प्रभा,पटना

मुश्कुराने का एक बहाना...........!///प्रशांत सरकार


कितनी अजनबी है जिंदगी,

कितने अनजाने रास्ते,
कभी खुशियों का हसीं मंजर,
कभी गम के बदल काले,
लम्हों के साये पर हौले-हौले,
लिख जाते है कितने ही अफ़साने,
चाहे-अनचाहे उम्र के हर मोड़ पर,
यादों का एक कारवां,
साथ हो जाता है हमारे,
और हम रफ्ता-रफ्ता,
नए मुकाम की तलाश में,
बढते जाते है आगे ही आगे,
जहाँ दूर........ नजर आता है,
क्षितिज का अनूठा नजारा,
ख्वाहिशों को मिल जाता है,
मुश्कुराने का एक बहाना...........!

 

--प्रशांत सरकार,मधेपुरा
दवा की बढ़ती घटती खुराक से होने वाली घटनाओं को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा माइक्रोचिप लांच किया है जिससे माइक्रोचिप के जरिए मरीज को दवा की खुराक दी जाएगी।



यह माइक्रोचिप मरीज को उतनी ही मात्रा में दवा देगी जितनी मरीज के शरीर को आवश्यकता होगी। इस माइक्रोचिप से कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। इस माइक्रोचिप को मरीजों की तवचा के नीचे लगाया जाएगा। साथ ही इस माइक्रोचिप का उपयोग ऑस्टियोपोरोसिस नामक बिमारी में किया जा रहकहै।

माइक्रोचिप लगा यह उपकरण पांच सेंटीमीटर लंबा, तीन सेंटामीटर चौडा और एक सेंटीमीटर मोटा है। इसके भीतर इलेक्ट्रॉनिक्स लगे हैं जिसमें दवा एवं दवा के छोटे पैकेट को प्लैटिनम एवं टिटेनियम के छोटे पैकेट्स को रखा गया है।

पहली नजर में भा जाते हैं ऐसे पुरुष





विप‍रीत सेक्‍स के प्रति आकर्षण लाजिमी है। दोनों एक दूसरे को रिझाने के लिए तरह तरह से प्रयास करते हैं।   यही वजह है कि आम तौर पर पुरुषों की दिलचस्‍पी यह जानने में होती कि आखिर महिलाएं पुरुषों की किस बात पर फिदा होती हैं।

वैसे हर किसी की पसंद तो अलग-अलग होती है, फिर भी इस बारे में शोध से कई दिलचस्‍प नतीजे सामने आए हैं।  

अध्‍ययन में बताया गया है कि महिलाएं गठीले शरीर वाले पुरुषों की तरफ भले ही आकर्षित होती हों, लेकिन सम्बन्ध बनाने के लिये वे हुनरमंद मर्दों को ही तरजीह देती हैं।  

एक शोध में करीब 75 प्रतिशत औरतों ने कहा कि वे खुद को फिट रखने की कवायद में घंटों गुजारने वाले मर्दों के बजाय वैसे पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं जो गैजेट तथा प्रौद्योगिकी के बारे में भी बेहतर समझ रखता हो।  

आधी से ज्यादा महिलाओं ने कहा कि चीजों को बनाने की काबिलियत रखने वाले व्यक्ति के साथ रहने से उन्हें अच्छा महसूस होता है।   बहरहाल, तीन में से सिर्फ एक महिला ने ही गठीले बदन वाले पुरुषों को पसंद करने की बात कही।

कांग्रेस देगी धरना

सुपौल: केन्द्र सरकार की तर्ज पर पिछड़ों के 27 प्रतिशत आरक्षण में पिछड़े अल्पसंख्यकों को 4.5 प्रतिशत आरक्षण बिहार सरकार की सेवाओं तथा शिक्षण संस्थानों में अविलम्ब लागू करने के बाबत जिला कांग्रेस कमिटी पांच मार्च को समाहरणालय पर एक दिवसीय धरना देगी। उक्त जानकारी पार्टी के जिलाध्यक्ष राज नारायण गुप्ता ने दी।

इस आइटम गर्ल ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, देखें तस्वीरें और जाने राज!




पटना। भोजपुरी फिल्मों की आइटम गर्ल और अभिनेत्री सीमा सिंह ने एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। जिसे तोड़ना किसी भी आइटम गर्लके लिए नामुमकिन तो नहीं लेकिन मुश्किल जरूर होगी। 

 
सीमा ने महज 6 दिन के अंदर 8 आइटम सौंग करके तहलका मचा दिया है। ये सभी आइटम सौंगबड़े निर्माता-निर्देशकों के फिल्मों के हैं। काफी हेक्टिक शेड्यूल के बाद भी सीमा ने हार नहीं मानी और इस अनोखे रिकॉर्ड को रच डाला।

 
सीमा ने निर्देशक रमाकांत प्रसाद की फिल्म 'जान तेरे नाम', ग्रीन चिली इंटरटेनमेंट की फिल्म 'गोला बारूद', शुभम तिवारी,रानी चटर्जी स्टारर 'जख़्मी औरत', विराज भट्ट तथा मोनालिसा की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'दबंग मोर बालमा', प्रवेश लाल यादव तथा शुभी शर्मा स्टारर 'हीरो' सहित कुल आठ सिनेमा में आइटम सौंग की रिकॉर्डिंग की हैं।

 
उल्लेखनीय है कि भोजपुरी फिल्मों में संभावना सेठ के बाद सबसे ज्यादा पॉपुलर आइटम डांसर के रूप में सीमा सिंह को जाना जाता है। जिस तरह से सीमा काम कर रही हैं, वो निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। ऐसे में संभावना सेठ के लिए सबसे बड़ा खतरा बनके सीमा भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सामने आ रही हैं।

~~~~~~आत्मकथा~~~~~~~~



आज मै अपनी आत्मकथा लिखने

बैठा
तो खुद से पूछा की क्या मै
स्वयं की आत्मकथा लिख सकता हू.
थोडा घबराया फिर
हिम्मत कर लिखने बैठ गया
आत्मकथा लिखना आसान नहीं है
आत्मकथा आत्मा की आवाज है
जिन्दगी का आईना है
अच्छे बुरे शब्दों का संगम
अपनी आलोचना करनी पड़ती
सत्य को शब्द देना पड़ता है
फिर भी मै लिखने लगा अपनी आत्मकथा
लिखते वक्त मै स्वार्थी बन जाता
सत्य को छुपाता झूठ को बनाता
अपना मुँह मिया मिट्टू
परन्तु खुद को सम्भाल कर लिखना छोड़ देता
फिर सत्य को अपने अंदर से निकलता
मैंने महसूस क्या की लिखते वक्त
खुद को शुन्य में रखना पड़ता है
अपना स्वाभिमान,अंहकार,कर्म,भावनाएं
रिश्ते नाते को दूर रखना पड़ता है
और मै इन सबों से दूर नहीं जा सकता
अपनी आत्मकथा मै नहीं लिख सका
और कोई अपनी आत्मकथा
लिख भी नहीं पाता ,लिख भी नहीं पाता ........


--हेमंत सरकार, मधेपुरा

भक्ति बनाम मस्ती:मंदिर की बजाय थियेटर में उमडती है भीड़

वि० सं०/०२ मार्च २०१२
सिंघेश्वर का प्रसिद्ध मेला अपने उफान पर है.दिन भर लोगों की भीड़ यहाँ जमी रहती है.देखने को इस मेले में इस बार अनेकों चीजें हैं.मौत का कुआं, सर्कस, सिनेमा, विभिन्न प्रकार के झूले, सैंकडों दुकानें आदि-आदि.दिन में तो मेला देखने आये लोगों में से बहुत से लोग बाबा के दर्शन हेतु मंदिर की ओर रूख करते भी हैं,पर शाम ढलते ही यहाँ का नजारा बदला हुआ नजर आने लगता है.मेले की भीड़ किसी खास जगह एकत्रित होने लगती है.और रात के नौ-दस बजे तक तो अधिकाँश भीड़ मेले में चल रहे तीन-तीन थियेटरों के इर्दगिर्द मंडराना शुरू करती है.थियेटरों के टिकट काउंटरों पर टिकट खरीदने की होती है होड़.इस दौरान बाबा भोले का मंदिर सूना सा दीख पड़ता है.भक्ति की जगह लोगों पर मस्ती का रंग चढ़ जाता है.

जानिए किसी भी स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

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स्त्री हो या पुरुष, सभी के पास कुछ गुण, कुछ शक्तियां होती हैं जिनसे वे अपने कार्य सिद्ध कर सकते हैं। वैसे तो हर व्यक्ति की अलग-अलग शक्तियां होती हैं लेकिन आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किसी भी स्त्री की शक्ति उसकी सुंदरता, यौवन और मीठी वाणी होती है। चाणक्य कहते हैं-

बाहुवीर्यबलं राज्ञो ब्राह्मणो ब्रह्मविद् बली।

रूप-यौवन-माधुर्यं स्त्रीणां बलमनुत्तमम्।।

किसी भी राजा की शक्ति उसका स्वयं का बाहुबल है। ब्राह्मणों की ताकत उनका ज्ञान होता है। स्त्रियों की ताकत उनका सौंदर्य, यौवन और उनकी मीठी वाणी होती है।

आचार्य कहते हैं कि वैसे तो किसी भी राजा के अधीन उसकी सेना, मंत्री और अन्य राजा रहते हैं लेकिन उसका स्वयं का ताकतवर होना भी जरूरी है। यदि कोई राजा स्वयं शक्तिहीन है तो वह किसी पर राज नहीं कर सकता।

गांव के इस सपूत का कमाल, खोज निकाला टीबी का रामबाण इलाज

अवाहदेवी.ग्रयोह गांव के मनोज कुमार को ट्यूबरक्लोसिस अवाहदेवी.(टीबी) की नई दवा खोजने पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पोस्टर प्रजेंटेशन अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस से नवाजा गया है। युवा वैज्ञानिक मनोज कुमार पीयू में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सीनियर फेलो हैं।


मनोज ने बताया कि उन्होंने टीबी की यह एक नई दवाई खोजी है। यह दवा एक ओर जहां टीबी के माइक्रो वेक्टीरियर को मरीज की कोशिकाओं से बाहर निकालेगी वहीं टीबी के लिए वेक्सीन का भी काम करेगी। उनका कहना है कि इस दवा के अब तक खरगोश पर किए गए प्रयोग काफी सफल रहे हैं।
 इस दवाई को वेक्सीन के रूप में लिया जा सकता है। दवा लेने वाले को टीबी होने का खतरा नहीं रह जाएगा। इस दवा का सेवन करने पर टीबी व्यक्ति के शरीर में इम्यूनिटी बढ़ेगी और टीबी का वेक्टेरिया कोशिकाएं छोड़ बाहर निकल जाएगा।
 

सफलता के रास्ते में जब भी समस्या आए तो इस नजरिए से करें समाधान...

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भगवान कृष्ण ने अपने मामा कंस का वध किया। मथुरा का शासन फिर अपने नाना को सौंपा। बचपन में ही एक बड़े अत्याचारी को मार दिया। भगवान शिक्षा ग्रहण करने अवंतिका नगरी (वर्तमान में मध्य प्रदेश के उज्जैन) में आ गए। गुरु सांदीपनि से 64 कलाओं की शिक्षा लेने के बाद मथुरा लौटे। उनके लौटने के बाद से ही कंस के ससुर जरासंघ ने अपने दामाद की मौत का बदला लेने के लिए मथुरा पर आक्रमण किया।

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पंच, पेंच और पंचर

यदि आप खुद को सामाजिक प्राणी मानते हैं तो खुदा को भूल गए होंगे मगर सामाजिक गति-विधियों से अनभिज्ञ नहीं होंगे. राज्य और राष्ट्र की राष्ट्र की राजनीति  भले ही आपके पल्ले न पड़ती हो ,लेकिन सामाजिक नीति से बेखबर नहीं होंगे. सामाजिक नियन्त्रण के शायद दो अहम विधान है-नैतिकता और राजदंड.यदि नैतिकता तलाक की अर्जी बढ़ा देती है तो समाज उसे ढकेलकर अदालत की चौखट तक पंहुचा देता है. जाओ, भाड़  में और भाड़ में ऐसा की जलते रहो,मगर कभी राख नहीं बन पाओगे.
     स्वार्थपरता की अंधी दौड़ में शायद रिश्ता-नाता आज सबसे बड़ा बाधक है. उसका परित्याग करना ही कल्याणकारी है. तभी तो अपनों को भी उखारने-पछाड़ने में अपनी उर्जा झोंकना आये दिन घाटे का सौदा नहीं माना जाता. अपनी गांठ ढीलीकर औरों को मिट्टी में मिलाना सफल जीवन का अंतिम लक्ष्य रह गया है.सच,दूसरों का सुख ही अपने लिए दुःख का सबसे बड़ा कारण है.
     पंच कभी प्रेमचंद की कागजी कहानी का परमेश्वर हुआ करता था,लेकिन आज वह अप्रासंगिक हो चला है.उसने कई रूपों में अपना परिचय देना शुरू कर दिया है.उसकी  अनोखी अदा पर आज गिरगिट भी फ़िदा है.आज के जुम्मन शेखों के द्वारा खालाजान की खाल में भूसा भरवाने जैसे सुबह-कार्यों में उसने दिलखोल कर सहयोग किया है

रविवार विशेष- व्यंग- मेरे गदहा गुरुजी



                    मेरे गदहा गुरुजी
 

शीर्षक  पढ़ व सुनकर अति ढीठ सिगरेटी-शिखरेटी छात्र-छात्राएं भी गुरु-निंदा की बू सूंघकर मेरे घोर निंदक बन बैठेंगे. हाईटेकी प्रेम खिलाड़ी मटूकी गुरु-घंटालों का रक्तचाप असामान्य होने की सौ फीसदी संभावना है.लेकिन बन्दा के दिलोदिमाग में कतई सोच-खरोंच नही है कि गुरु निंदा जैसा महापाप का भागीदार बनने का दुस्साहस पैदा हो सके.
        अपना राम महज गुरुओं के फेहरिस्त में एक और गुरु को शुमार करने की ठान ली है.शिक्षा और सबक तो नाचीज चींटी तक से ली जा सकती है,फिर गदहा जैसा निश्छल प्राणी भला अछूता क्यों रहेगा? वैसे भी पशु-पूजन की परंपरा अपने महान भारत में पूर्व से ही रही है.गणेश वाहक मूषक जी आज भी सर्वत्र पूजनीय हैं.
        उस दिन न्यायालय के किनारे चायखाने में बैठा मैं गर्मागर्म चाय सुडक रहा था.अपने तथाकथित स्वप्न-गुरु अष्टावक्र जी की बरबस याद हो आयी.आये दिन गुरुजी से मेरा नेटवर्क ठीक उसी तरह फेल है जिस प्रकार ओसामा-बिन-लादेन से टुच्चे आतंकवादियों का.मेरी नजर सड़क पर चहलकदमी कर रही थी.
       समाहरणालय के द्वार के सामने प्रबुद्ध भारतीय नागरिक की नई सड़क का अतिक्रमण करता एक मरियल सा गदहा दृष्टिगोचर हुआ.सच,उस क्षण गदर्भ-दर्शन पाकर मैं निहाल हो उठा.मेरी आँखों में ठीक वैसी ही चमक उभर आई जैसे धाकड़ क्रिकेटरों को मैच फिक्सिंग एजेंटों को देख कर आती है.