सिर पर बनी चोटी को शिखा भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिस प्रकार अग्नि के बिना हवन पूर्ण नहीं होता है ठीक उसी प्रकार चोटी या शिखा के बिना कोई भी धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है। प्रारंभ से ही शिखा को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह एक अनिवार्य परंपरा है, इससे व्यक्ति की बुद्धि नियंत्रित होती है।
इन कारणों से बहुत जरूरी है सिर पर चोटी रखना
सिर पर बनी चोटी को शिखा भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिस प्रकार अग्नि के बिना हवन पूर्ण नहीं होता है ठीक उसी प्रकार चोटी या शिखा के बिना कोई भी धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं हो सकता है। प्रारंभ से ही शिखा को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह एक अनिवार्य परंपरा है, इससे व्यक्ति की बुद्धि नियंत्रित होती है।
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