बेटियों के घर खाली हाथ क्यों नहीं जाना चाहिए?

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बेटियां तो बाबुल की रानियां है। मीठी-मीठी प्यारी-प्यारी ये कहानियां है। सबके दिल की सारे घर की ये रानियां है ये चिडिय़ा एक दिन फुर्र से उड़ जानीयां है... जिस तरह इस फिल्मी गीत की ये पंक्तियां दिल को छू जाती है। ठीक उसी तरह बेटियों के चहकने से घर का हर त्यौहार खुशियों से भर जाता है लेकिन बेटियों को एक दिन अपने ससुराल जाना ही पड़ता है क्योंकि यही परंपरा है।।बेटियां एक ही कुल को नहीं बल्कि दो कुलों को रोशन करती हैं। आपने बढ़े-बुजूर्गों को अक्सर कहते सुना होगा कि बेटियों के ससुराल में माता-पिता या अन्य मायके वालों को कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।

दरअसल हर परंपरा के पीछे हमारे पूर्वजों की कोई गहरी सोच जरूर रही है। बेटियों की शादी में कई रस्में होती है। जिनके बिना शादी होती ही नहीं है। उन्हीं रस्मों में से एक है कन्यादान। कन्यादान शादी का मुख्य अंग माना गया है। शास्त्रों के अनुसार दान करना पुण्य कर्म है और इससे ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। दान के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में कई नियम बनाए गए हैं ताकि दान करने वाले को अधिक से अधिक धर्म लाभ प्राप्त हो सके।

इसी से जुड़ी एक परंपरा और भी है वह यह कि बेटियों के घर खाली हाथ नहीं जाना चाहिए यानी बिना किसी तरह की भेंट लिए  बेटी के घर जाना शास्त्रों के अनुसार भी उचित नहीं माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है बेटी, वैद्य और ज्योतिष के घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इन्हें दान करने पर बहुत अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है और क न्यादान के पुण्य फल में वृृद्धि होती है। साथ ही यह ज्योतिषीय मान्यता या उपाय भी है कि घर की दरिद्रता मिटाने के लिए बेटियों को दान देना चाहिए कहते हैं इससे मायके में सुख व सम्पन्नता बढ़ती है। इसीलिए कहा जाता है कि बेटियों के घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।

धर्म में ये चार बातें हैं सबसे ज्यादा काम की

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धर्म के मामले में चार बातें काम की हैं- सेवा, सत्य, परहित और अहिंसा। हमारे यहां एक प्यारा शब्द है धर्मभीरू, यानी धर्म से डरने वाला। धर्म सृष्टि को धारण करने वाला शाश्वत नियम है। केवल पूजा-पाठ को पूरी तरह से धर्म नहीं माना जा सकता। वह तो उपासना है।

मनु ने धर्म के 10 लक्षण बताए हैं- धैर्य, क्षमा, दम, दस्तेय, शौच, इंन्द्रिय निग्रह, बुद्धि, विद्या, सत्य और अक्रोध। इन नियमों की आवश्यकता तो हर वर्ग, हर जाति को पड़ेगी चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो कि जैन हो। सीधी सी बात यह है कि मनुष्य को इन नियमों का पालन करना चाहिए। इन नियमों से डरना चाहिए, न कि धर्म से डरना चाहिए।

धर्मभीरू होने का अर्थ तो यही लगा लेते हैं कि धर्म से डरो, जबकि डरना धर्म के नियमों से चाहिए। ट्रेफिक पुलिस से नहीं, ट्रेफिक नियमों से डरना चाहिए। हम अपने कर्तव्य से एक अच्छी व्यवस्था को जन्म दें। यहीं से शुरू होता है सेवाधर्म। परमात्मा ने हर काम के लिए किसी न किसी को चुन रखा है, वैसे ही हम भी चुने गए हैं।

असंतुष्ट और अशांत दाम्पत्य में कैसे लाएं सुख?

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  • .इस समय दो तरह के दाम्पत्य चल रहे हैं। पहला अशांत दाम्पत्य और दूसरा असंतुष्ट दाम्पत्य। जो पति-पत्नी ना समझ हैं उनके उपद्रव, खुद उनके सामने और दुनिया के आगे जाहिर हो जाते हैं। वे अपनी अशांति पर आवरण नहीं ओढ़ा पाते।

दूसरे वर्ण का दाम्पत्य वह है जिसमें पति-पत्नी थोड़े समझदार या कहें चालाक हैं, लिहाजा इस अशांति को ढंक लेते हैं, उपद्रव को खिसका भर देते हैं। ऐसा दाम्पत्य असंतुष्ट दाम्पत्य है। फिर ये असंतोष स्त्री या पुरुष दोनों को ही अपने-अपने गलत मार्ग पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर देता है। जिन्हें सचमुच घर बसाना हो वे चमड़ी की तरह एक बात अपने से चिपका लें और वह है प्रेम।

बिना प्रेम के परिवार चलाया जा सकता है, बसाया नहीं जा सकता।

सदी की सबसे महंगी शादी

शादी में जो केट कटेगा उसकी कीमत 27 लाख है। वहीं दुल्‍हन के कपड़ों पर 4 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं। शादी की कार्ड से लेकर शादी में जिन वर्तनों में खाना परोसा जाएगा वह भी खास है। शादी की कार्ड सोने और चांदी से तैयार किए गए हैं वहीं चीन से करोड़ों का वर्तन मंगवाया जा रहा है।ब्रिटेन के राजकुमार की शादी की चर्चा पूरी दुनिया में है क्‍योंकि कहा जा रहा है कि ऐसी शादी इस सदी में पहले कभी नहीं हुई।

यह शादी न सिर्फ दुनिया के 200 प्रभावशाली लोगों के पहुंचने के कारण महत्‍वपूर्ण है बल्कि इस शादी में 4500 करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे हैं। पूरा ब्रिटेन अपने राजकुमार की शादी के लिए जमकर तैयारियां कर रहा है। ब्रिटेन के हर गली चौराहों को सजाया गया है साथ ही शहर के हर प्रमुख जगह पर ग्रैंड पार्टी रखी गई है।



चॉकलेट बनाता है जवां

अगर आप जवां बने रहना चाहते हैं तो डार्क चॉकलेट से परहेज नहीं दोस्‍ती करने की जरूरत हैं क्‍योंकि शोधकर्ताओं के मुताबिक सही मात्रा में खाई गई चॉकलेट मोटापे को कम करने और दिल की बीमारियों को रोकने में मददगार साबित हो सकती है।

विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की डॉ. लिलि स्तोजानोव्स्का और डॉ. जॉन एश्टन की नई किताब, ' चॉकलेट डाइट- हाउ टू ईट चॉकलेट एंड फील ग्रेट अबाउट इट ' में यह बात कही है।

डॉक्टर लीली का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाली चॉकलेट में इपीकटेचिन एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है, जो वसा कम करने में मदद करता है। चॉकलेट के प्रमुख तत्व कोका में थिओब्रोमाइन एल्कलॉइड भी अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो पेशियों के उत्तेजन और उर्जा को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, साथ ही यह रक्त वाहिकाओं को फैलाता है तथा रक्तदाब को घटाता है।

मोटी महिलाओं का दिमाग तेज होता है

मोटापा मोटी महिलाओं के फिगर को जरूर प्रभावित करता है लेकिन एक शोध में पता चला है कि मोटापा महिलाओं के दिमाग को तेज बनाता है। अमरीका के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मोटी महिलाओं का दिमाग आम महिलाओं की तुलना में ज्यादा तेज होता है।

शोधकर्ताओं ने इसका कारण उनके दिमाग में एक खास रसायन के स्त्राव का बढ जाना बताया है। इस रसायन के स्त्राव के बढने से महिलाओं का दिमाग तेज हो जाता है।

शोध के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ मोटी महिलाओं के बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर प्रतिभागियों के आकार, कद और वजन को ध्यान में रख कर उनके स्कोर जमा किए । उन्‍होंने पाया कि अधिक वजन वाली महिलाओं ने बुद्धि तीक्ष्णता के मामले में दुबली महिलाओं की तुलना में ज्यादा अंक पाए।

नमक खाने से नहीं बढ़ता बीपी

आमतौर पर ब्लड प्रेशर के मरीज को नमक खाने से मना किया जाता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर के मरीजों को स्वाद से समझौता करना पड़ता है लेकिन वैज्ञानिकों ने शोध करने के बाद पाया है कि कम या ज्यादा नमक खाने से उच्च़ रक्त चाप का कोई संबंध नहीं है। न ही ज्यादा नमक खाने से उच्च् रक्त‍चाप की बीमारी बढ़ती है।

बेल्जियम की लोवेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 3681 लोगों पर सालों शोध करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। इस शोध को अमेरिकन एसोसिएशन जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है। लेकिन अटलांटा के वैज्ञानिक इस शोध से सहमत नहीं है उनका कहना है कि इस शोध पर अभी और कार्य करने की जरूरत है।

कविता- मन

मन
एक हूँ मैं और एक है मन
सीमित हूँ मैं,व्यापक है मन.
मेरी दुनिया बस है मुझ तक,
मन की दुनिया नील गगन तक.
इच्छाओं को पंख लगे हैं,
पहुँच नही पाती हूँ मन तक.
दबा हुआ है बोझ तले तन
पर उड़ने को आतुर है मन.
एक हूँ मैं और एक है मन.....
तन पर शासन हो सकता है,
मन पर क्या हो पाता है?
बंधन कितने ही तुम डालो
मन क्षण में उड़ जाता है.
दुःख में ही डूबे हो क्यों ना;
मन फिर भी मुस्काता है.
मन की समग्र वेदना पर
मन ही हावी हो जाता है.
हर पल,हर क्षण,सुबह-शाम
नित गीत सुहाने गाता है मन.
एक हूँ मैं और एक है मन.....
   --जूही शहाब,पुणे(madhepura times)

जय हो तेरी देवी महंगाई

जय हो तेरी देवी महंगाई,
तू ने सबके होश ठिकाने लाई|
करता मै तेरा गुणगान,
है कौन तुझसे अधिक महान|
महिमा तेरी बड़ी निराली ,
आती आगे जब कभी थाली |
बस होती रोटी दो-चार ,
सदा जीवन ऊँच-विचार |
तू सबको यह सिखलाती है,
सबको सन्मार्ग पर लती है |
प्याज के बदले काटे आलू ,
फिर भी नैन बहाती नीर |
तेरी हवा से इन मूर्खों को ,
होती देवी अतिशय पीड |
ये क्या जाने तेरा दम ,
तू करती जनसंख्या कम |
सब्जी-सी नाचीज को भी ,
तू दिलवाई अधिक सम्मान |
तेरे कारण लाल टमाटर ,
पाए माणिक-सा मान |
है नेताओं की तू हथियार ,
थर्राती है तुझसे सरकार |
निर्धनों को तू उपवास कराती ,
और सिखाती है हठयोग |
तेरी महिमा कितनी न्यारी ,
क्या जाने ये मुरख लोग |

रवि राज,दिग्घी,मुरलीगंज

कोशी नदी

कोसी  नदी
कोसी नदी बहुत पुरानी है
लेकिन नया इसका पानी है|
इसके ही तेज से है
जनपद हमारा जगमग
और इसके दम से
खेती है किसानी है|
कोसी नदी बहुत पुरानी है|
उत्तर से उतरती है
पर्वत के शिखर से
पत्थर से पिघलती
उग्रधारा हिमानी है
कोसी नदी बहुत पुरानी है|
बरसात के मौसम में
बन जाती काली कोसी
करती विनाश-लीला
आ-जाता सुनामी है|
कोसी नदी बहुत पुरानी है
लेकिन नया इसका पानी है|

__संतोष सिन्हा
बिहार प्रदेश श्रीकांत वर्मा साहित्य समिति,मधेपुरा

नसीहत

भगवान न करे आप को,
भीख मांगनी पडे ,जाइए !
कमाइए ,कमाकर खाइए ,
नेता को मत निहारिये ,
कुछ फायदा नहीं होगा |
वे पांच बरस पर बस ,
एक बार भीख मांगते है,
फिर ,मौज मस्ती में जीते है ;
सोमरस पीते हैं ,छप्पन भोग पाते हैं ;
और ,चैन की वंशी बजाते है |
सच ,नेता सर्वाहारी जीव हैं
उसकी खुराक असाधारण होती है,
उनके दिल के कई चैम्बर होते है;
वे कई संस्था के मेम्बर होते है ;
कोयला को खाते है चारा को चबाते हैं ;
पेट्रोलियम को पीते है ,अलकतरा को चाट जाते हैं|
तथापि मल मूत्र सामान्य रूप से त्यगते है ;
सुखाड़ में सोते है तो बाढ़ में जागते है |
बेधड़क बोलूंगा आजादी इन्ही के भाग्य से मिली है ,
अंग्रेज सरकार शायद इंडिया से हिली है |
--पी .बिहारी बेधड़क

ये मेरा बिहार है

बिहार दिवस पर विशेष
है कंध जो ये हिंद का
जो बुद्ध का विहार है
गूंजे छठ गीत यहीं
बहे जो गंग धार है
जो मौर्यों का शौर्य है
कुंवर का जो आधार है
गुरु की वाणी बरसे जहाँ
दिनकर की रसधार है

नदियों, रत्नों, फसलो से भरा
ये पुण्य धाम बिहार है                                                     


हुआ सत्य आग्रह शुरू यहाँ
स्वाधीनता का जो आधार है
श्रम और प्रतिभा उपजे जिधर
जो ज्ञान का भण्डार है
युव-घोष गुंजरित जहाँ
भोज-मग-मैथिल जहाँ व्यवहार है

अतुल संपदाओं से विभूषित
ये पुण्य धाम बिहार है
है राज्य बुद्धिजीवियों का ये
राजनीति का आधार है

मैं ख़ुशबू हूँ , बिखरना चाहती हूँ

कहाँ बनना, संवरना चाहती हूँ
मैं ख़ुशबू हूँ, बिखरना चाहती हूँ

अब उसके क़तिलाना ग़म से कह दो
मैं अपनी मौत मरना चाहती हूँ

हर इक ख्वाहिश, ख़ुशी और मुस्कराहट
किसी के नाम करना चाहती हूँ

गुहर मिल जाए शायद, सोच कर, फिर
समुन्दर में उतरना चाहती हूँ

ज़माना चाहता है और ही कुछ
मैं अपने दिल की करना चाहती हूँ

है आवारा ख़यालों के परिंदे
मैं इनके पर कतरना चाहती हूँ

कोई बतलाए क्या है मेरी मंज़िल
थकी हूँ, अब ठहरना चाहती हूँ

--श्रद्धा जैन,सिंगापुर(madhepura times)

रविवार विशेष-कविता- "शायद मोहब्बत का भरम टूट जाए"

आज तुम
बहुत याद आये
क्युं ?
नहीं जानती
शायद
तुमने पुकारा मुझे
तेरी हर सदा
पहुँच  रही है
मन के
आँगन तक
और मैं

भीग रही हूँ
अपने ही खींचे
दायरे की
लक्ष्मण रेखा में

जानती हूँ
तड़प उधर भी
कम नहीं
कितना तू भी

बेचैन होगा
बादलों सा
सावन बरस
रहा होगा
मगर ना
जाने क्यूँ
नहीं तोड़
पा रही
मर्यादा के
पिंजर को
जिसमे दो रूहें
कैद हैं